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दशमूल क्वाथ के फायदे नुकसान | गुण और उपयोग | सेवन विधि | dashmool kwath benefits in Hindi

Byanantclinic0004

Jun 7, 2020
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दशमूल क्वाथ का क्या उपयोग है

दशमूल क्वाथ जैसा कि इसके नाम से ही पता चल रहा है यह क्वाथ 10 मूल अर्थात 10 औषधिय पौधों की जड़ से बना हुआ है। आप ऐसा भी कह सकते हैं कि यह 10 आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों का एक संयोजन है। जिसका उपयोग पीठ के निचले हिस्से में दर्द होना, बुखार होना और फेफड़ों की समस्याओं जैसे विभिन्न रोगों के उपचार में किया जाता है। इसके अलावा भी दशमूल क्वाथ के बहुत से फायदे हैं जिनके बारे में विस्तार से आज हम इस ब्लॉग में जानेंगे तो आइए जानते हैं दशमूल क्वाथ के फायदे, नुकसान, गुण और उपयोग तथा सेवन विधि के बारे में।

दशमूल क्वाथ के मुख्य घटक

छोटी और बड़ी कटेरी का पंचांग, शालिपर्णी और पृशि्नपर्णी का पंचांग, बेलछाल, गम्भारी-छाल, सोनापाठा-छाल, अरणी-छाल, पाढ़, गोखरू का पंचांग या फल प्रत्येक समान भाग लेकर यवकुट चूर्ण कर रख लें।

दशमूल क्वाथ की मात्रा और सेवन विधि

इसमें से एक तोला चूर्ण लेकर 16 तोला जल में पकावें, जब 4 तोला जल बाकी रहे, तब नीचे उतार कर कपड़े से छानकर पिलावें, यह क्वाथ आवश्यकतानुसार दिन भर में दो-तीन बार दें।
वात रोग में भी इस क्वाथ का उपयोग अनुपानरूप रूप में दिया जाता है। पुराने वायु रोग में वातघ्न औषधियां जैसे- महायोगराज गूगल, वातारि बटी, वात चिंतामणि रस, अमरसुंदरी वटी (रस) आदि दवाओं के साथ अनुपानरूप रूप में दिया जाता है।
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दशमूल क्वाथ के फायदे नुकसान | गुण और उपयोग | सेवन विधि | dashmool kwath benefits in Hindi

1- इस क्वाथ का उपयोग वात और कफ-संबंधी विकारों में विशेष होता है। प्रसूत रोग के लिए यह क्वाथ प्रसिद्ध है। वात प्रकोप में भी अनुपान रूप से इसका प्रयोग किया जाता है।
2- मुंह सूखना, हाथ-पांव ठंडे पड़ जाना, चक्कर आना, पसीना अधिक आना आदि में भी इसके सेवन से विशेष लाभ होता है।
3- खांसी, श्वास, छाती तथा पसली का दर्द, तन्द्रा ( झपकी आना ) और सिरदर्द युक्त सन्निपात ज्वर, सूतिका ( प्रसूत ) ज्वर और शोथ रोग में दशमूल क्वाथ के प्रयोग से अच्छा लाभ होता है।
4- यदि सन्निपात ज्वर में प्रलाप और नींद ना आना यदि यह लक्षण भी हों, तो इस क्वाथ के योग में लौंग, ब्राह्मी, जटामांसी, तगर, शंखाहुली और सर्पगंधा प्रत्येक एक-एक तोला और मिला दें। इससे यह क्वाथ बहुत गुणकारी हो जाता है।
5- प्रसव के बाद प्यास अधिक लगना, रक्त की कमी, पेट का दर्द, संपूर्ण अंगों में दर्द होना, अन्न में अरुचि आदि लक्षण उपस्थित होने पर दशमूल क्वाथ का उपयोग करना बहुत लाभदायक सिद्ध होता है।
6- प्रसव के बाद कमजोरी और थकान आना प्रसूता स्त्री के लिए स्वाभाविक बात है। बच्चा पैदा होने के बाद पेट में दूषित रक्त आदि रह जाते हैं, जिन्हें बाहर निकालना अति आवश्यक होता है, नहीं निकलने से अनेक प्रकार के रोग उत्पन्न हो जाते हैं।


जैसे – ज्वर, मक्कलशूल, अन्न में अरुचि, रक्त की कमी, संपूर्ण शरीर में दर्द होना, शरीर में शोथ ( सूजन ) होना आदि ऐसी स्त्रियों का दूध भी दूषित हो जाता है। जिसका बुरा प्रभाव बच्चे के ऊपर भी होता है। बच्चा पैदा होने से पहले यदि ज्वर आदि आता रहता है तो वह रोग भी प्रसव के बाद और अधिक बढ़ जाता है। इन उपद्रवों को रोकने या दूर करने के लिए दशमूल क्वाथ का प्रयोग करना बहुत उपयोगी है।
7- बच्चा पैदा होने के दिन से लेकर 10 दिन पर्यंत दशमूल क्वाथ प्रसूता को अवश्य देना चाहिए, क्योंकि 10 दिनों में प्रसवजन्य अनेक तरह की वेदना बच्चों को होती हैं। इस वेदना को दूर करने के लिए दशमूल क्वाथ का उपयोग बहुत लाभदायक है, फिर प्रसूतजन्य कोई भी बीमारी होने का डर भी समाप्त हो जाता है।
8 – प्रसूता को अधिक उष्ण उपचार से बचाएं। अधीक उष्ण उपचार से शरीर में गर्मी विशेष होकर अनेक उपद्रव होने का खतरा बढ़ जाता है।
जैसे – मुंह में छाले हो जाना, हाथ पॉंव और आंखों में जलन होना, दूध कम होना, इतना ही नहीं बच्चे के मुंह में भी छाले हो जाते हैं, शरीर पर छोटी-छोटी फुंसियां हो जाती हैं, दूध कम मिलने की वजह से बच्चा बराबर रोता रहता है और बच्चे का शरीर विशेषकर चेहरा लाल वर्ण का हो जाता है, इसमें भी उष्णताजन्य उपद्रवों को दूर करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है।

दशमूल क्वाथ के नुकसान | dashmool kwath ke side effects in hindi 

दशमूल क्वाथ वैसे तो पूर्णतः आयुर्वेदिक औषधि है और आयुर्वेद सार संग्रह में भी इससे होने वाले किसी भी प्रकार के नुकसान का वर्णन नहीं मिलता फिर भी अपने नजदीकी आयुर्वेदिक चिकित्सक से अपनी जांच करवाने के बाद ही इसका सेवन करें।

दशमूल क्वाथ की कीमत

दशमूल क्वाथ एक पूर्णतया आयुर्वेदिक औषधि है। आप इसे बिना डॉक्टर की पर्ची के ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरीकों से बड़ी आसानी से खरीद सकते हैं।

बैद्यनाथ दशमूल क्वाथ की 450ml की बोतल की कीमत ₹190 है।

संदर्भ:- आयुर्वेद-सारसंग्रह. श्री बैद्यनाथ भवन लि. पृ. सं. 806



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